शिरिषा बांदला की जीवनी | Sirisha Bandla Biography

शिरिषा बांदला की जीवनी | Sirisha Bandla Biography: भारत देश का नाम अमेरिका तक में रोशन करने वाली शिरिषा बांदला जिसने इतिहास में अपना नाम दर्ज कर लिया और अंतरिक्ष में घूमने वाली दूसरी भारतीय महिला के रूप में आज पूरे विश्व में अलग पहचान बना चुकी है।

पहली भारतीय महिला कल्पना चावला ने अंतरिक्ष की यात्रा की थी, परंतु स्पेस शटल कोलंबिया की दुर्घटना की वजह से उन्हें अपनी जान गवानी पड़ी थी।

कल्पना चावला के पास शिरिषा बांदला भारत की ऐसी दूसरी महिला बन गई हैं जो अंतरिक्ष की यात्रा कर चुकी हैं और वापस भी आ गई हैं। वापस आने के बाद उनके और उनके परिवार की खुशी का कोई ठिकाना ही नहीं है।

भारत की ऐसी बेटी पर भारत के हर व्यक्ति को नाज है और यही उम्मीद है कि शिरिषा बांदला से प्रेरित होकर भारत की हर बेटी अपने सपनों की उड़ान को लेकर आसमान की बुलंदियों को जरूर छुएगी।

शिरिषा बांदला का प्रारंभिक जीवन

भारत के आंध्र प्रदेश के गुंटूर शहर में पैदा हुई एक आम लड़की जिसका नाम शिरिषा बांदला रखा गया। हालांकि वह इंडिया में ज्यादा दिन नहीं रही क्योंकि उसके माता-पिता अमेरिका में ही रहते थे।

शिरिषा ने बचपन से ही आसमान में उड़ते रॉकेट और स्पेसक्राफ्ट को बहुत करीब से देखा है उन्होंने हमेशा से ही अंतरिक्ष में जाने की इच्छा जताई है, और धीरे-धीरे अंतरिक्ष के बारे में नई नई बातें जानने की जिज्ञासा उनके अंदर बढ़ती जा रही थी।

अमेरिका के ह्यूस्टन टेक्सास नामक स्थान पर सिरिशा ने अपना बचपन गुजारा और वहीं पर अपनी पढ़ाई पूरी की। बचपन से ही आसमान की बुलंदियों को छूना उसका सपना था जो उसने एस्ट्रोनॉट बनकर पूरा कर लिया।

शिरिषा बांदला की जीवनी के बारे में संक्षिप्त विवरण

नाम शिरिषा (सिरिशा) बांदला
निक नेम शिरिषा (सिरिशा)
जन्म दिवस सन 1987
जन्म स्थान गुंटुर आंध्र प्रदेश, भारत
होमटाउन ह्यूस्टन टेक्सास यूएसए
प्रोफेशन भारतीय मूल की अमेरिकी एस्ट्रोनॉट
उम्र 34 साल
जाति बांदला
धर्म हिंदू
राष्ट्रीयता भारतीय-अमेरिकी
सैलरी NA
नेटवर्थ NA
शौक ट्रैवलिंग और स्विमिंग
वैवाहिक जीवन अविवाहित

शिरिषा बांदला की शिक्षा

एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन सिरीशा ने Purdue university से पूरा किया और मास्टर आफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन की पढ़ाई के लिए जार्जटाउन यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया।

हालांकि सिरीशा एयरफोर्स में भर्ती होकर एक पायलट के रूप में बनकर अपने सपनों को उड़ान देना चाहती थी, परंतु वह यह नहीं जानती थी कि एक दिन वह नीले आसमान को छोड़कर खुले अंतरिक्ष की सैर करके पूरे विश्व में भारत का नाम रोशन करेगी।

शिरिषा बांदला का करियर

पढ़ाई में हमेशा अच्छा प्रदर्शन दिखाने वाली सिरीशा साल 2015 में वर्जिन गैलेक्टिक कंपनी के साथ जुड़ गई। गैलेक्टिक कंपनी मैं वाइस प्रेसिडेंट के रूप में कार्यरत हुई जो सरकारी मामलों में कंपनी को सपोर्ट करती हैं। इससे पहले वह एयर स्पेस इंजीनियर के रूप में टेक्सास की एक कंपनी में भी काम कर चुकी हैं।

उसके बाद उन्होंने कमर्शियल स्पेस फ्लाइट फेडरेशन में भी बतौर एसोसिएट डायरेक्टर काम कर चुकी हैं। गैलेक्टिक कंपनी में अब तक 747 विमानों का उपयोग और परीक्षण करके वे अंतरिक्ष में एक उपग्रह को भी पहुंचा चुकी हैं।

गैलेक्टिक के साथ जुड़े उन्हें अब 6 साल हो चुके हैं जिसके बाद उन्होंने उस कंपनी में अपना एक ऐसा पद प्राप्त किया है की अंतरिक्ष यात्रा पर जाने वाले 5 लोगों में से एक नाम उनका भी है।

शिरिषा बांदला की अंतरिक्ष यात्रा

11 जुलाई की सुबह वर्जिन गैलेक्टिक कंपनी की तरफ से एक अंतरिक्ष यान अंतरिक्ष यात्रा पर गया, जो रिचर्ड ब्रेनसन की स्पेसक्राफ्ट कंपनी की तरफ से गया था। स्पेसक्राफ्ट में रिचर्ड ब्रेनसन के साथ चार लोग और इस यात्रा के सहभागी बने थे जिसमें से एक नाम सिरीशा का भी है।

भारत देश को अंतरिक्ष में गौरवान्वित करने वाली सिरीशा टैक्सास अमेरिका की मूल निवासी है। हालांकि वह भारत में जन्मी परंतु अमेरिका मे अपनी पढ़ाई पूरी करके बड़ी हुई।

सुनीता विलियम्स और कल्पना चावला के बाद अंतरिक्ष यात्रा करने वाली तीसरी महिला के रूप में सिरीशा बांदला ने अपना नाम इतिहास में दर्ज करा लिया है।

हालांकि यह उनकी बचपन से लेकर अब तक का मेहनत का फल है जो उन्हें गैलेक्टिक कंपनी में 6 साल काम करने के बाद प्राप्त हुआ। सिरीशा की इस सफलता पर भारत के प्रत्येक नागरिक के साथ-साथ उनके परिवार को भी बहुत गर्व है।

शिरिषा बांदला को पुरुस्कार

  • सिरीशा एक अच्छी एस्ट्रोनॉट होने के साथ-साथ अमेरिका में स्थित तेलुगू एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ अमेरिका से भी जुड़ी हुई है। कुछ साल पहले ही उन्हें तेलुगू एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ अमेरिका की तरफ से यूथ स्टार अवार्ड से नवाजा गया था।
  • अमेरिका एस्ट्रोनॉटिकल सोसाइटी एंड फ्यूचर फेस लीडर्स फाउंडेशन के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में भी सिरीशा का नाम शामिल है।
  • Purdue यूनिवर्सिटी के यंग प्रोफेशनल एडवाइजरी काउंसलिंग में भी वह अहम सदस्य के पद पर हैं।
  • फिलहाल वर्जिन ऑर्बिट के वाशिंगटन ऑपरेशंस के पद को नेतृत्व करने वाली सिरिशा बांदला ही है। आपको बता दें कि वर्जिन ऑर्बिट अंतरिक्ष यान को अंतरिक्ष में ले जाने के लिए कैरियर प्लेन कॉस्मिक गर्ल का सहारा लिया गया, जिसको नीचे लगाकर पृथ्वी से लगभग 35000 फीट की ऊंचाई तक ले जाया गया।

शिरिषा बांदला के बारे में रोचक जानकारी

  • सिरीशा अमेरिका के सबसे बड़े और पुराने indo-american संगठन जो तेलुगू एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ अमेरिका है उससे जुड़ी हुई है और वहां की यूथ स्टार अवार्ड से सम्मानित हो चुके हैं।
  • वर्तमान में वह अमेरिकन एस्ट्रोनॉटिकल सोसाइटी और फ्यूचर फेस लीडर फाउंडेशन के निदेशक मंडल के रूप में कार्यरत है।
  • बचपन से ही अंतरिक्ष में जाने का सपना उन्होंने देखा था जिसे बड़े होकर पूरा कर लिया।
  • मात्र 6 वर्षों में उन्होंने पृथ्वी से अंतरिक्ष की यात्रा तय कर ली मतलब उन्होंने अपना सपना पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत की और आखिरकार अंतरिक्ष की यात्रा कर दिखाई।
  • कल्पना चावला और सुनीता विलियम्स के बाद तीसरी महिला के तौर पर उन्होंने अपना नाम कमाया जिसने अंतरिक्ष यात्रा की।

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