जोसफ विजय की जीवनी | Joseph Vijay Biography

जोसफ विजय की जीवनी | Joseph Vijay Biography: जोसफ विजय एक भारतीय फ़िल्म अभिनेता, पार्श्व गायक, निर्माता और भारत में कई कंपनियों के लिए एक प्रवक्ता हैं।

1984 में, उन्होंने फिल्म ‘Vetri’ में एक बाल कलाकार के रूप में अपने फिल्म करियर की शुरूआत की, जिसे उनके पिता द्वारा निर्देशित किया गया था। इसके बाद उन्होंने अपने फ़िल्मी करियर की शुरुआत नालया थीरपू (1992) फ़िल्म से की। उन्होंने एक्शन और रोमांस की कई फ़िल्मों में अभिनय किया।

चेन्नई फ़िल्म उद्योग में अपने करियर के दौरान, उन्हें एक फ़िल्म फेयर अवार्ड के लिए नामांकित किया गया और उन्होंने तीन तमिलनाडु राज्य फ़िल्म पुरस्कार जीते। एक पार्श्व गायक के रूप में, विजय ने अपनी फिल्मों में तीस गाने गाए हैं, जिसकी शुरुआत “बॉम्बे सिटी” (1994) से हुई है।

उन्होंने अपने गीत “सेल्फी पुल्ला” (2014) के लिए वैश्विक ध्यान आकर्षित किया। उनके अभिनय और गायन करियर के अलावा, उनकी फिल्मों में उनके डांस मूव्स के लिए भी उनकी प्रशंसा की जाती है।

जोसफ विजय का जन्म

जोसेफ़ विजय चंद्रशेखर का जन्म 22 जून 1974 को चेन्नई, तमिलनाडु, भारत में हुआ था। उनका पूरा नाम जोसेफ़ विजय चंद्रशेखर है।

इसके अलावा उन्हे इलैय्याथसापथी (Ilayathalapthy) के नाम से भी जाना जाता है। उनके पिता का नाम एस.ए. चंद्रशेखर है, जो की एक फ़िल्म निर्माता एवं निर्देशक है तथा उनकी माता का नाम शोभा चंद्रशेखर और वे शास्त्रीय तथा पार्श्व गायिका है।

उनकी एक बहन भी थी जिनका नाम विद्या चंद्रशेखर था, जिनका दो साल की उम्र में ही निधन हो गया।

विजय की शादी लंदन-स्थित श्रीलंका के तमिल संगीता सोर्नालिंगम के साथ 25 अगस्त 1999 को हुई थी।

उनके दो बच्चे हैं, उनके बेटे का नाम जेसन संजय जो 2001 में लंदन में पैदा हुआ और एक बेटी का नाम दिव्या साशा है, जिसका जन्म 2005 में चेन्नई में हुआ।

शिक्षा

विजय ने अपनी स्कूली शिक्षा चेन्नई में विरुगाम्बक्कम के बाललोक से पूरी की और दृश्य संचार का कोर्स लोयोला कॉलेज, चेन्नई में किया। लेकिन अभिनेता बनने के लिए उन्होंने अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी।

जोसफ विजय का करियर

विजय ने अपने पिता द्वारा निर्मित, 1992 में बनी फ़िल्म नालया थीरपू में एक मुख्य अभिनेता के रूप में अपने अभिनय करियर की शुरुआत की।

कुछ अन्य फ़िल्मों के बाद, सेंढूरापंदी फ़िल्म में उन्होंने विजयाकंथ के साथ काम किया। इस फ़िल्म ने विजय को तमिलनाडु के आंतरिक क्षेत्रों में लोकप्रिय बना दिया| रसिगन, विष्णु, और देवा जैसी कम बजट की फ़िल्मों ने उन्हें दर्शकों के बीच स्थापित कर दिया।

विजय अपनी पीढ़ी के कुछ उन चुनिंदा अभिनेताओं में से एक हैं जिन्होंने जाने – माने वरिष्ठ अभिनेता शिवाजी गणेशन के साथ काम किया है।

यह अवसर उन्हें 1996 में अपने पिता एस.ए. चंद्रशेखर द्वारा निर्देशित फ़िल्म, वन्स मोर में काम करते हुए मिला।

विजय को अपनी पहली सफल फ़िल्म 1996 में बनी विक्रमन निर्देशित फ़िल्म पूवे उनक्कागा के रूप में मिली जिसने विजय को तमिल फ़िल्मों में एक उभरते हुए स्टार के रूप में स्थापित करने में काफी मदद की।

कुछ और फ्लॉप फ़िल्मों के बाद उन्हें, लव टुडे फ़िल्म की जिसमें एक अपरंपरागत अंत था के साथ सफलता मिली।

1997 में उन्होंने सूर्य शिवकुमार के साथ वसंत की फ़िल्म नेर्रुक्कू नेर में अभिनय किया। यह फ़िल्म मणिरत्नम द्वारा निर्माण की गई थी।

इसके बाद उन्होंने फाजिल द्वारा निर्देशित कधालुक्कू मरियाधई में अभिनय किया। कधालुक्कू मरियाधई एक ब्लोकबस्टर फ़िल्म मानी गयी और इस फ़िल्म ने विजय को उस वर्ष का तमिलनाडु राज्य सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फ़िल्म पुरस्कार भी दिलाया।

1998 में, विजय ने प्रियामुदन और थुल्लाधा मनामुम थुल्लुम में काम किया, दोनों फ़िल्में बोक्स ऑफिस पर हिट रहीं।

इसके बाद आई फ़िल्में एन्द्रेंदृम कधाल, नेंजिनिले, मिन्सरा कन्ना बॉक्स-ऑफिस पर बुरी तरह से पीट गयीं।

इसके बाद उन्होंने फाजिल के साथ कन्नुक्कुल निलावु फ़िल्म की, उनके अभिनय की प्रशंसा हुई पर फ़िल्म बॉक्सऑफिस पर असफल रही।

अपना रुख बदलते हुए, उन्होंने एक साल से ज्यादा लेने वाली फ़िल्मों में काम नहीं करने का फैसला किया।

उनकी अगली फ़िल्म कुशी थी जो 2000 की सुपर हिट फ़िल्म थी।

उसके बाद आयीं प्रियामानावाले, फ्रेन्ड्स जैसी फ़िल्में विजय के लिए एक बार फिर सफलता लायीं और बद्री और एक सुपर हिट फ़िल्म रहीं।

फिर उन्होंने शाहजहां, थामिजहन में काम किया जो सभी बॉक्स ऑफिस पर असफल रही और उसके बाद आई युथ में फिर औसत सफलता मिली, लेकिन, उसके बाद आई फ़िल्में बगावाथि, वसीगारा, पुधिया गीथाई, और लंबे समय से बन रही फ़िल्म उधाया बहुत कम आमदनी ला पाई और फ्लॉप हो गई।

इसने विजय की सफलता के दर को काफी प्रभावित किया और फ़िल्म आलोचकों एवं निर्माताओं की नज़र में वह नीचे उतरते गए।

असफल फ़िल्मों के उनके तार 2003 में थिरुमलाई द्वारा टूट गये जिसमे जोसफ विजय एक नए चेहरे के साथ नज़र आयें।

2004 में रिलीज़ हुई, घिल्ली, विजय की अबतक की सबसे बड़ी हिट फ़िल्मों में से एक मानी जाती हैं। धरनी द्वारा निर्देशित और ए.एम्. रथ्नम द्वारा निर्मित, यह एक तेलुगू फ़िल्म ओक्कादु की रीमेक थी और यह फ़िल्म तमिलनाडु में सिनेमाघरों में 200 दिनों तक चली थी।

उसके बाद आई माधुरी जो बॉक्स ऑफिस पर औसत सफल रही। इस साल में विजय ने अपने मौजूदा जन नायक, टकसाली अभिनय शैली, को चित्रित करना शुरू किया, जिसने उन्हें अपने करियर में एक महत्वपूर्ण मोड़ दिया। अगले वर्ष मेगा हिट थिरुपाची, एक विशिष्ट रोमांटिक विनोदी फ़िल्म साचें और एक सुपर हिट सिवाकासी के रूप में अन्य प्रमुख सफलता मिली।

थिरुमलाई की रिलीज के बाद विजय की पहली असफल फ़िल्म आथी रही, जो 2006 में प्रदर्शित हुई थी। यह फ़िल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह से असफल रही।
उस वर्ष में उन्होंने पोक्किरी फ़िल्म की घोषणा की, जो प्रभु देवा ने निर्देशित की और 2007 में प्रदर्शित हुई। पोक्किरी को लगभग घिल्ली जैसी ही सफलता मिली, जिसमें विजय को एक अलग शैली में अभिनय करने का मौका मिला था।

इसने जोसफ विजय को M.G.R. यूनिवर्सिटी से मानद डॉक्टरेट की उपाधि दिलाई।
उसी वर्ष, विजय अज्हगीय थामिज्ह मगन में दिखाई दियें और इस फ़िल्म में पहली बार वह दोहरी भूमिका में नज़र आयें। इस फ़िल्म में उनकी भूमिका, विरोधी और नायक के रूप में थी, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर फ़िल्म बुरी तरह से फ्लॉप हो गई।

2008 में उन्होंने कुरुवी में अभिनय किया, जो धरनी द्वारा निर्देशित थी और नकारात्मक समीक्षा के साथ प्रदर्शित हुई, हालाकि फ़िल्म बॉक्स ऑफिस पर कमाल नहीं दिखा पाई, वितरकों के लिए कुछ स्थानों पर लाभ कमाने में कामियाब रही।

2009 की शुरुआत एक्शन फ़िल्म विल्लू के साथ हुई, जो पोक्किरी के बाद उनके साथ दुबारा काम करने को उत्सुक प्रभु देवा द्वारा निर्देशित थी। इस फ़िल्म में, विजय अपने करियर में दूसरी बार दोहरी भूमिका में नज़र आयें।

पुरस्कार

  1. जोसफ विजय ने अपना पहला फ़िल्म पुरस्कार1997 तमिलनाडु राज्य फ़िल्म पुरस्कारों में जीता, जहां उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए विशेष पुरस्कार दिया गया था।
  2.  इसके बाद में उन्होंने थुल्लाधा मनामुम थुल्लुम (1999) और थिरुपाची (2005) के लिए इसी श्रेणी में और अधिक पुरस्कार प्राप्त किए।
  3. रिलायंस मोबाइल विजय पुरस्कार 2007 के दौरान, विजय ने पोक्किरी और अज्हगीय थामिज्ह मगन जैसी फ़िल्मों में उनके प्रदर्शन के लिए “एंटरटेनर ऑफ़ द इयर पुरस्कार” जीता।
  4.  2005 में, रेडियो मिर्ची, स्पार्क 2005 विज्ञापन क्लब के सहयोग से चेन्नई में, चेन्नई लोक सेवा घोषणा के लिए विजय को रजत पुरस्कार दिया।
  5. 2007 में, विजय को एस.शंकर के साथ M.G.R. यूनिवर्सिटी, चेन्नई से मानद डॉक्टरेट डिप्लोमा की उपाधि दी गयी थी

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